पाकिस्तान में हिन्दुओं की दुर्दशा का ज़िम्मेदार कौन?

भारत के कुछ हिन्दू विरोधी व अंग्रेज़ों के पिट्ठू नेताओं ने 1947 में सत्ता के लालच में देश का बंटवारा स्वीकार कर लिया। सत्ता का लालच इस कदर छाया था कि चीन, पाकिस्तान व नेपाल जैसे दुश्मन पड़ौसी देशों से अंतराष्ट्रीय सीमा तक निर्धारित नहीं की जिसका खामियाज़ा पूरा देश आज तक भुगत रहा है।भारत का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ, कांग्रेस के नेहरू और गाँधी ने सारा इतिहास व भूगोल ही बदल कर rakh दिया मगर सच्चाई ये है कि 1947 के विभाजन ने उस काल की 30 करोड़ आबादी वाले भारत में 1.50 करोड़ हिन्दुओं को दर-ब-दर कर दिया। 75 हजार से 1 लाख महिलाओं का बलात्कार या हत्या के लिए अपहरण हुआ। हजारों बच्चों को कत्ल कर दिया गया। महीनों तक चले दंगों में कम से कम 10 से 20 लाख हिन्दू और सिखों का मुसलमानो ने क़त्ल कर दिया। हिंसा, भारी उपद्रव और अव्यवस्था के बीच पाकिस्तान से सिख और हिन्दू भारत की ओर भागे।

भारत के अंधे व अदूरदर्शी कांग्रेसी नेताओं ने देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने की बजाए धर्मनिरपेक्ष राज्य बनाना पसंद किया, ताकि भारत में रहने वाले मुसलमान व ईसाई खुद को असुरक्षित न समझें, उन्हें समान अधिकार मिलें और इसके लिए भारत ने अपने संविधान में धर्म चुनने की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकारों की सूची में स्थान दिया। भारत-विभाजन से पहले मुसलमानों की संख्या भारत की कुल आबादी का लगभग 9 प्रतिशत थी, जो आज कितनी हो गयी है कोई भी नहीं जनता मगर सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बढ़कर लगभग 15 से 20 प्रतिशत हो गई हैउधर पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दुओं की किस्मत भारतीय मुसलमानों जैसी न तब थी, न आज है। जब भारत का विभाजन हुआ था तब पाकिस्तान में हिन्दुओं की आबादी 22 प्रतिशत के लगभग थी। पाकिस्तान में बसे हिन्दुओं में से लगभग 96 फीसदी सिंध प्रान्त में ही रहते हैं। वर्ष 1956 में पाकिस्तान का संविधान बना और पाकिस्तान एक कट्टर इस्लामिक देश बन गया, जिसमे हिन्दू होकर जीना एक अभिशाप से भी बदतर हो गया ।

इसी जनवरी 2020 को पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए दिल्ली स्थित मजनू के टीले पर रह रहे 200 हिंदू परिवारों के प्रतिनिधि मंडल ने सांसद राजेंद्र अग्रवाल के आवास पर उनसे मुलाकात की। उन्होंने जो बताया वह रौंगटे खड़े कर देने वाला है। ये लोग वर्ष 2011 में पाकिस्तान से भारत आ गए थे। वहां हिन्दुओं पर हमले, हिन्दू व् सिख लड़किओं का अपहरण, बलात्कार व ज़बरन धर्म परिवर्तन एक आम बात है। किसी की मृत्यु हो जाने पर दाह संस्कार नहीं करने दिया जाता बल्कि शव को दफ़नाने के लिए दबाव डाले जाते हैं। होली ओर दिवाली मनाने के लिए भी मना किया जाता था। प्रतिनिधि मंडल में शामिल चंद्रमा ने बताया कि पाकिस्तान में उनके बच्चों को पता ही नहीं था कि दिवाली और होली कैसे और क्यों मनाए जाते हैं? कोई पूजा भी नहीं करने दी जाती थी। स्कूलों में हिन्दू बच्चों को कुरान पढ़ना पड़ता है। हिन्दुओं के घरों पर ज़बरन कब्ज़ा कर लिया जाता है। भारत में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) बन जाने के बाद उन्हें राहत मिली है। इन हिन्दू परिवारों ने कहा कि (CAA) लागू हो जाने पर पूरे देश में ऐसा लग रहा है जैसे कोई अन्याय हो गया है, लेकिन उन जैसे लाखों पीड़ित परिवारों ko इससे लाभ मिला है उन्होंने इसका स्वागत किया है।

17 Hindu girls abducted in Pakistan in just 45 days in 2019

पाकिस्तान अखबार डॉन का कहना है कि पाकिस्तान से हर साल तकरीबन 5000 हिंदू परिवार भागकर भारत आते हैं. हालांकि ये संख्या पिछले कुछ बरसों में काफी बढ़ गई है। आमतौर पर ये शरणार्थी राजस्थान, दिल्ली और मध्य प्रदेश में शरण लेते हैं. वर्ष 2018 में भारत सरकार ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान से आए 12,732 मुसलमानों और सिखों को नागरिकता दी. इससे पहले 2017 में 4712 को शरण दी गई. 2016 में 2298 हिंदू और सिख शरणार्थियों को शरण मिली

पाकिस्तान में हिन्दुओं की दुर्दशा का ये हाल है कि पाकिस्तान को ‘रियासत-ए-मदीना’ बनाने का वादा करने वाली इमरान खान सरकार कोरोना महामारी के बीच हिंदुओं को राशन नहीं दे रही है। कोरोना संकट को देखते हुए यहां पर मुसलमानों को राशन और जरूरी सामान दिया जा रहा है लेकिन हिंदुओं को मना कर दिया गया है। हिंदुओं से कहा जा रहा है की राशन सिर्फ मुस्लिमों के लिए है

1947 में जहाँ पाकिस्तान में 428 मंदिर थे अब केवल 20 ही बचे हैं। बाकी के 408 मंदिरों को या तो गिरा दिया गया है या वहां कोई और काम शुरू कर दिया गया है । दूसरी ओर भारत में इस बात का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है की 1947 में यहाँ कितनी मस्जिदें थीं व आज कितनी हैं। फिर भी आंकड़े कहते हैं की भारत में चार लाख से ज़यादा मस्जिदें आज की तारीख में बन चुकी हैं जिस में से तक़रीबन एक लाख मस्जिदें videshi मुसलमान आक्रमणकारिओं ने हिन्दू मंदिरों को तोड़ कर बनवाई थीं।

पाकिस्तान, बांग्ला देश और अफ़ग़ानिस्तान में हिन्दू होना गुनाह है। हिन्दू वहां पर एक गली है। और सबसे दुःख की बात यह कि भारत में मुसलमानों को सर पर बिठाने वाली कांग्रेस ने कभी एक बार भी अपने शासन काल में वहां तड़प रहे हिन्दुओं के लिए कुछ करना और कहना तो दूर, जो हिन्दू और सिख वहां से 1948 के बाद किसी तरह जान बचा कर भारत पहुँच भी गए उनकी तीन पुश्तें जम्मू और देश के दुसरे हिस्सों में सड़कों पर पैदा हो कर सड़कों पर ही ख़त्म हो गयीं। न राशन कार्ड, न आधार कार्ड, न नौकरी । वहीँ रोहिंग्या व बांग्लादेशी घुसपैठिये मुसलमानों को और पाकिस्तानी आतंकवादिओं को कांग्रेस पार्टी व पश्चिमी बंगाल की हिन्दू दुश्मन ममता बनर्जी मिनटों में आधार कार्ड तक बनवा के भारत के नागरिक बनवा रहीं हैं ।

सच तो यह है कि असली गाँधी से लेकर नेहरू और नेहरू का नकली गाँधी परिवार जिसे आजकल ‘ इतालियन गांधीओं के नाम से भी पुकारा जाता है, सदा से मुसलमानों के हिमायती व हिन्दुओं के प्रति नफरत और विरोध के लिए जाना जाता है। जब महात्मा गाँधी ने कहा था कि पाकिस्तान मेरी लाश के ऊपर बनेगा तो फिर गाँधी अपनी ज़ुबान से क्यों मुकर गए और 20 लाख हिन्दू सिखों के क़त्ल की ज़िम्मेदारी से क्या वो बच सकते हैं ? जब जब देश में ‘ पर्सनल लॉ ‘ चल रहे थे और चल रहे हैं तो क्या हक़ था इंदिरा गाँधी को कि 1976 में उसने सविंधान में ‘ सेक्युलर ‘ शब्द ठोक दिया ? महात्मा गाँधी ने तीन बार देश को धोखा दिया। 1929 और 1937 में कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए गाँधी ने नेहरू को ज़बरदस्ती अध्यक्ष बनवाया । और 1946 में जब 15 प्रदेश कांग्रेस समितिओं में से 12 ने सरदार पटेल का नाम पर मोहर लगाई और तीन ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया तो नेहरू और गाँधी दोनों के सीने पर सांप लोट गया। aakhir गाँधी ने आचार्य कृपलानी से गुहार लगाई, दो – तीन लोगों से ज़बरदस्ती नेहरू के नाम को आगे किया गया, सरदार पटेल को कहा कि स्वयं ही अपना नाम वापिस से ले और इस तरह बेशर्मी से नेहरू को कांग्रेस अध्यक्ष व आज़ाद भारत के प्रधान मंत्री बनाने का रास्ता साफ़ किया गया। आज कश्मीर समस्या, 370, 35A पाकिस्तान, नेपाल व चीन के साथ सीमा विवाद, नेहरू का भारत कि ज़मीन के कई टुकड़ों को चीन, पाकिस्तान, नेपाल व श्रीलंका को उपहार में दे देना, भारत में मुसलमानो को सर पे बिठाना व पाकिस्तान में हिन्दुओं को मरने के लिए छोड़ देना अनेक ऐसे उदहारण हैं जो आज के नए भारत को आगे ही नहीं बढ़ने दे रहे ।

1990 में कश्मीर से 4.5 लाख हिन्दुओं का पलायन, हज़ारों औरतों का बलात्कार, हज़ारों हिन्दुओं के क़त्ल, हज़ारों हिन्दुओं के घर बार व व्यपारों पर मुसलमानो का कब्ज़ा, अपने ही देश में अपने ही हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों से कांग्रेस पार्टी का गहरा नाता है। बजाय इसके कि हिन्दू मुसलमानों व अन्य अल्प संख्यकों को आपस में जोड़ा जाये कांग्रेस पार्टी ने हमेशा ही बर्तानवी फार्मूला ‘ फूट डालो व राज करो ‘ की नीति को अपना कर देश को कई और हिस्सों में बाँट दिया जिसका फायदा दुश्मन देशों के अलावा मुसलमान देशों, ब्रिटैन, यूरोप, अमरीका व अन्य देशों की विदेश नीति ही भारत के प्रति बदल गयी है। आज भारत में भारतीयों के प्रति लिया गया कोई भी निर्णय अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बन जाता है क्योंकि कांग्रेस के हाथ बहुत लम्बे हैं । आज एक भी देश पाकिस्तान में आखरी सांस ले रहे हिन्दुओं की बात नहीं करता मगर भारत के हर अंदरूनी मामले में हस्तक्षेप करता है क्योंकि कांग्रेस व अधिकतर भारतीय डिजिटल व प्रिंट मीडिया बिकाऊ है ।

इस विषय पर हज़ारों पन्ने लिखे जा सकते हैं । आप इस विषय को किस नज़रिये से देखते हैं, अवश्य लिखिए, आपके विचारों का इंतज़ार रहेगा ।

%d bloggers like this: