पूज्य सिख गुरुओं का हिन्दू धर्म को बचाने के लिए अतुलनीय बलिदान !

सिख धर्म के लोग भारत की जनसँख्या का दो प्रतिशत भी नहीं हैं ! मगर उन जैसी बहादुर, बलिदानी व् जनसेवा के लिए सदैव तत्पर कौम पूरे विश्व में कहीं नहीं है ! इस देश के कितने हिन्दू इस सत्य को जानते हैं कि भारत की आज़ादी के संग्राम में 121 देशभक्तों को अंग्रेज़ों ने फांसी दी जिन में से 93 सिख भाई थे; कुल 2626 देशभक्तों को उम्र कैद की सजा हुई थी जिनमें 2147 सिख धर्म के जांबाज़ थे और जलिआंवाला बाग़ के 1300 शहीदों में से 799 सिख थे ! इस से बड़ा देशभक्ति व् बहादुरी का उदहारण और क्या होगा ? मगर वाह रे गाँधी, वह रे नेहरू, वाह रे कांग्रेस, इस शानदार कौम के शानदार इतिहास ka भारत के किसी स्कूल कॉलेज के किसी कोर्स की किसी भी किताब में कोई ज़िक्र नहीं मिलता ! बस ऐसा ही पढ़ाया जाता है कि एक चरखे व् एक पैदाइशी राईस ने भारत को आज़ादी दिलवा दी ! चलो इस विषय पर फिर कभी चर्चा करेंगे, आज बात करते हैं हमारे सिख धर्म के उन गुरुओं की जिन्होंने हिन्दू धर्म को बचाने के लिए सर्वोच्च शहीदियाँ दीं!

सिख धर्म के पहले गुरु नानक व् भारत में मुग़ल राज का संस्थापक बाबर समकालीन थे ! बाबर ने भारत पर अपना पहला हमला सैदपुर पर किया जिसका नाम उसने बाद में अमीनाबाद रख दिया था जो आज के पाकिस्तान में है! मुसलमानों व् मुग़ल हमलावरों की पता नहीं क्यों एक बीमार मानसिकता रही है कि उन्होंने जहाँ भी राज किया, हमला किया, लूटपाट की, वहां उन्होंने मंदिर तोड़े, शहरों के नाम बदल दिए, मर्दों के बेशुमार क़त्ल किये, औरतों का बलात्कार किया व् लाखों 8 – 10 वर्ष की बच्चिओं को उठा कर अपने साथ अपने देश ले जाते रहे ! जब बाबर ने सैदपुर पर हमला किया तो गुरु नानक देव जी वहीँ पर थे ! बाबर ने हज़ारों हिन्दुओं का क़त्ल किया, मंदिरों को तोड़ा,